थिरकती - परमजीत कौर ।

ऐ ज़िंदगी ,
ये कैसा मोड़ है ....?
मंज़िल किस ओर है ...?
कहीं जीवन की जद्दो -जहद और भूख से बोझिल चेहरे ,
कहीं दिखावा तो कहीं विवशता का अंधेरा !
मगर , इस मंज़र में हज़ारों आँखें ढूँढती हैं, अपना बसेरा !
ये कैसी पहेली है ...?
कभी तेज़ धूप से धमकाती ,
तो कभी आसमान से बरसती बूंदों में थिरकती,
ढाढ़स  भी बंधाती है ।
आँख बंद की तो ,
हौले से कान में कह जाती है – बस , थोड़ा और सब्र कर !
सुकून से , आँख खोल दी मैंने,
मगर, फिर वही मायूसी !
वही अंधेरा !
कब होगा ...खुशियों का सवेरा ...?

परमजीत कौर
SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment

कंत दर्शन पब्लिशर्स इकाई महाराज दर्शन दास चैरिटेबल ट्रस्ट ने गुरू महाराज कंत जी द्वारा रचित पुस्तक ‘तूं ना आय्यों दिलबरा’’ (पंजाबी) का विमोचन किया गया

Tasim Ahamad - Chief Editor  दिल्ली :  कंत दर्शन पब्लिशर्स इकाई महाराज दर्शन दास चैरिटेबल ट्रस्ट ने बड़े हर्षोल्लास के साथ गुरू महाराज कंत जी...

_