हिंदी दिवस के अवसर पर कुछ पंक्तियाँ- आरती जैन ।

हिंदी आज करती है क्रंदन, 

एक दिन हिंदी को करतें वंदन l

हिंदी बन गयी है आज शर्म, 

अग्रेजी बना हमारा प्रथम धर्म l

परायें को भले दो तुम मान, 

पर अपनों की मत छीनों शान l

जो हिंदी थी गले का हार, 

आज  हिंदी बोलने कैंसी हार l

जब जननी मां से बन गयी है मम्मी, 

तब से मैंरी हिंदी भी गयी है सहमी l

इतना मत गाओं पराया तुम शुर, 

बिंदी वाली हिंदी आज भी है हूर l

हिंद देश में हम जहा आज रहते हैं, 

उसी हिंदी के आज आँसू बहते है l

हिंदी आज करती है क्रंदन, 

एक दिन हींदी को करतें वंदन l




 आरती जैन

                                          ( लेखिका )


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Milan Tomic

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