लेखिका: नेहा दुग्गल (पशु प्रेमी ओर समाजसेविका)
Tasim Ahamad - Chief Editor
इस धरती पर सबसे पहले पेड़-पौधे आए, फिर जानवर और बहुत बाद में मनुष्य । जंगलों और जानवरों का बहुत गहरा संबंध है । पेड़-पौधे व जीव-जंतु एक दूसरे के बिना अधूरे हैं । दुर्भाग्यवश, मानव खुद को बहुत बुद्धिमान समझते हुए अंधाधुंध जंगलों को काटता जा रहा है । जिस पर्यावरण के बिना हमारा अस्तित्व ही नहीं है, आज हम उस पर्यावरण को नष्ट करते जा रहे हैं । हम भूल गए हैं कि पेड़-पौधों से ही हम जिंदा हैं; हमें इन्हीं से प्राण-वायु मिलती है, सुकून व सेहत प्राप्त होती है ।
जंगलों की कटाई होने पर कई पशु-पक्षी बेघर हो रहे हैं, उनकी जनसंख्या घटती जा रही है, व कई की जातियाँ ही विलुप्त हो गई हैं । इंसान की जनसंख्या जरूरत से ज्यादा ही बढ़ती जा रही है । अब इंसान पेड़-पौधों और जैव-जंतुओं पर इतना अत्याचार कर रहा है कि जैसे केवल उसका ही इस पृथ्वी पर रहने का अधिकार है । अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए इंसान भूल गया है कि पर्यावरण को नष्ट करके वह अपने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को गर्त में गिरा रहा है ।
यदि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जलचर आदि ही नष्ट हो जाएँगे, तो इंसान का जीवन भी इस धरती पर संभव नहीं रहेगा । हम इंसान वास्तव में इन पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं के अभिभावक (संरक्षक) के रूप में ही इस धरती पर आए हैं । इस पर्यावरण की जिम्मेदारी हमारे कांधों पर है । ईश्वर ने केवल इंसान को ही बुद्धि दी है ताकि वह इस धरती पर पहले से मौजूद पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं को संरक्षण प्रदान करे और इस पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में सहयोग करे
हम सबको इस पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना चाहिए । जहाँ भी पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया जा रहा हो या इसे नष्ट करने की योजना बनाई जा रही हो, उसके खिलाफ पुरजोर आवाज उठानी ही होगी । हमारे पर्यावरण को हमारे प्यार व देखभाल की बहुत अधिक जरूरत है । प्रगति के नाम पर हो रहे शोषण के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाना हम सबकी जिम्मेदारी है । वरना, "अभी नहीं तो, फिर कभी नहीं" ।
हम सबको अपनी-अपनी यथा-शक्ति पेड़-पौधे लगाने चाहिए व जीव-जंतुओं की देखभाल करनी चाहिए । क्योंकि जीने का अधिकार ईश्वर के बनाए हर जीव को है । इंसान को अपनी बल-बुद्धि का दुरुपयोग कदापि नहीं करना चाहिए । अन्यथा, वह खुद ही अपने विनाश का कारण होगा ।


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