बुलंदशहर, 15 जून 2026, संवाददाता।
अक्सर सुर्खियों में बने रहने वाले अब्बास पठान उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंद शहर के बारा बस्ती घेसीपुर गांव के रहने वाले है जो पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। खेती, समाज सेवा, पशु-प्रेम और पुरखों की परंपराओं को साथ लेकर चलने वाले अब्बास पठान को लोग मिट्टी का सपूत कहकर भी बुलाते हैं।
अब्बास पठान पेशे से किसान हैं, उनके आम के बाग भी है।लेकिन उनकी सोच सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है अगर सूखा, बाढ़ या कोई आपदा आ जाए तो वह सबसे पहले जरूरतमंद परिवारों की मदद करने में आगे रहते हैं।
अब्बास पठान को बेजुबान जानवरों का दोस्त भी कहा जाता है। इनको गाय, भैंस, डॉग्स, घोड़े पालने ओर उनकी देखभाल करने का शौक है। उनके घर पर गाय, घोड़े ओर डॉग्स पले हुए हैं।
अब्बास पठान मानते हैं कि आधुनिकता के साथ अपनी जड़ें नहीं भूलनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने बुजुर्गों की परंपराओं को संभाल रखा है। हुक्का पीना उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि बड़े-बुजुर्गों की बैठकी संस्कृति को जिंदा रखने का एक तरीका भी है।
बचपन से ही घोड़ा सवारी करने का शौक है। अब्बास पठान कहते हैं कि घोड़ा हमारे बड़ों की आन-बान-शान रहा है। घुड़सवारी से इंसान में धैर्य, अनुशासन और संतुलन ये तीनों आते हैं। इतना ही नहीं अब्बास पठान को बुलेट मोटरसाइकल रखने और चलाने का बहुत शौक है।
इलाके में लोगों को कहना है कि आज की युवा पीढ़ी में अब्बास पठान के जैसा युवक बहुत ही कम मिलता है। जो खेत भी संभालता है, गरीब की मदद भी करता है और सभी धर्मों के रीति-रिवाजों की इज्जत करता है। आज की युवा पीढ़ी को इससे सीख लेनी चाहिए। अब्बास पठान का मानना है कि जमीन से जुड़कर रहोगे तो इज्जत भी मिलेगी और सुकून भी।



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