दिल्ली में 'काव्यशैली साहित्य सम्मान समारोह-2026' एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया,जिसमें देश भर के अलग अलग शहरों और राज्यों से आए कवि/कवयित्रियों को सम्मानित किया।
तथा 4-5 पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ, जिसमें एक पुस्तक डॉ. राज बाला "राज" कवयित्री का काव्य संग्रह "सुलगता मौन" पुस्तक का भी लोकार्पण हुआ।
डॉ राज बाला की दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और 11वीं पुस्तक पर कार्य चल रहा है।
डाॅ.'राज' को उनके उत्कृष्ट संपादन, सक्रिय लेखन कार्य, हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में किए गए कार्य एवं राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर सराहनीय कार्य करने के संदर्भ में और हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रख्यात कवयित्री एवं लेखिका डॉ.राज बाला 'राज' अब तक देश विदेश से 50 के करीब सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं,और साथ ही कई संस्थाओं में पदानुसार कार्यभार भी संभाल रही हैं। वर्ष 2022 में "अवधी साहित्य गौरव सम्मान" (नेपाल) से अलंकृत किया गया था
2020 में एतिहासिक ग्रंथ महाराष्ट्र की संस्था से वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाण पत्र भी मिला था,और 2018 में विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर बिहार संस्था द्वारा विद्यावाचस्पति (मानद उपाधि) भी प्राप्त कर चुकी हैं।
हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रख्यात कवयित्रआयोजकों ने बताया कि डॉ. राज बाला की रचनाएं समाज के यथार्थ को उजागर करती हैं और उनकी भाषा में लोक जीवन की मिठास है।
सम्मान ग्रहण करने के बाद डॉ. राज बाला "राज' ने कहा कि साहित्यकार का धर्म है कि वह समाज का दर्पण बने। यह सम्मान मुझे और अधिक जिम्मेदारी के साथ लिखने की प्रेरणा देगा। उन्होंने 'काव्यशैली' संस्था का आभार व्यक्त किया।

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