फरीदाबाद/बल्लभगढ़ : संवाददाता।
समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय संस्था 'नोबेल बर्तन बैंक' ने संवेदन शीलता की एक बेहतरीन मिसाल पेश करते हुए बल्लभगढ़ की एक संघर्षरत सिंगल मदर (अकेली माता) की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। संस्था ने महिला के 8 साल के बेटे का एडमिशन अपने पूरे खर्च पर एक प्रतिष्ठित गुरुकुल में करवा दिया है।
दरअसल, बल्लभगढ़ में रहने वाली एक महिला के पास दो बच्चे हैं—8 साल का बेटा और 5 साल की बेटी। बच्चों के पिता के न होने और आर्थिक तंगी के कारण अकेली माता के लिए दोनों बच्चों का पालन-पोषण करना और उनकी पढ़ाई का खर्च उठाना बेहद कठिन हो गया था।
माता की हार्दिक इच्छा थी कि वह अपने बेटे को किसी अच्छे गुरुकुल में दाखिल कराकर उसे बेहतर संस्कार और शिक्षा दिलाए। इस सिलसिले में उसने नोबेल बर्तन बैंक की टीम से संपर्क किया और अपनी परेशानी साझा की। महिला की व्यथा को समझते हुए संस्था की फाउंडर मोनिका गुप्ता और उनकी टीम ने तुरंत एक उपयुक्त और सुरक्षित गुरुकुल की तलाश शुरू की। दिनांक 21 सितंबर 2026 को ऋषिपथ विद्याकुलम गुरुकुल, बागथला (नंदेश्वर गोशाला के नजदीक), रेवाड़ी, हरियाणा में कक्षा तीसरी (3rd Standard) में बच्चे का अपने खर्च पर दाखिला करवा दिया। बताया जा रहा है कि इस गुरुकुल का शैक्षणिक और आवासीय वातावरण काफी अच्छा है, जहाँ वर्तमान में लगभग 20 बच्चे रहकर अध्ययन कर रहे हैं।
नोबेल बर्तन बैंक की फाउंडर मोनिका गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि संस्था इस परिवार की हरसंभव सहायता जारी रखेगी। उन्होंने मां को यह पूर्ण आश्वासन दिया है कि छोटी बच्ची की शिक्षा और उसके दाखिले के लिए भी संस्था द्वारा जल्द से जल्द सार्थक प्रयास किए जाएंगे। नोबेल बर्तन बैंक के इस सराहनीय कदम से एक जरूरतमंद परिवार के जीवन में शिक्षा की नई रोशनी जगी है, जिसकी चारों तरफ प्रशंसा हो रही है।


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