लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारों ने एक बार फिर महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। 'ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन ट्रस्ट (पंजी०)' के मंच से देश भर के पत्रकारों ने महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए हुंकार भरी है। इसी क्रम में संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित महिला पत्रकार और उनके परिजनों से उनके निवास स्थान पर मिलने पहुंचा। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित महिलाओं को जल्द न्याय नहीं मिला, तो पत्रकार सड़कों पर उतरकर देशव्यापी आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
थाने के अंदर महिलाओं पर बर्बरता, शासन-प्रशासन पर उठे सवाल -
हाल ही में थाने के अंदर महिलाओं के साथ हुई बर्बरता की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस अमानवीय कृत्य पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन ट्रस्ट (पंजी०) के राष्ट्रीय महासचिव तासीम अहमद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "साकेत थाने के एसएचओ (SHO) की अमर्यादित भाषा और महिला पुलिसकर्मी सोनम सोलंकी द्वारा दोनों महिला पत्रकारों को खींचकर ऊपर के कमरे में ले जाना, गेट बंद करके बड़ी बेरहमी से डंडे से पिटाई करना—आखिर इनकी मंशा क्या थी? इन्होंने थाने में खुलेआम दिल्ली पुलिस की छवि को धूमिल करने का कार्य किया है।"
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं पर हुई यह बर्बरता न सिर्फ कानून के रखवालों की अमानवीयता को दर्शाती है, बल्कि यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और महिला सम्मान के संकल्प पर सीधा आघात है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो महिलाएं कहां सुरक्षित महसूस करेंगी? हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को झुकने नहीं देंगे।
आखिर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं? - राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश चोपड़ा -
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश चोपड़ा ने इस पूरे प्रकरण पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुरजोर शब्दों में पूछा है, "इतनी गंभीर घटना सामने आने और मारपीट के तमाम सबूत होने के बावजूद अभी तक दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? पत्रकार होने के साथ-साथ वे देश की बेटियां हैं, और हम उनके साथ हैं।" राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि पुलिस और प्रशासन की यह हीला-हवाली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी -
ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन (पंजीकृत) ट्रस्ट के प्रदेश सचिव मोहम्मद आसिफ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि एक निश्चित समय सीमा के भीतर पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिला और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन देश के हर कोने में पत्रकारों को एकजुट कर एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


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