मंडला, दीप्ति कौर।
मध्य प्रदेश के मंडला में पशु प्रेमी निशा सिंह के नेतृत्व एक प्रतिनिधि मंडल के साथ जिला कलेक्टर को महामहिम राष्ट्रपति के नाम पांच मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। जो 59 साल के प्रसिध्द जलवायु कार्यकर्ता, पर्यावरण चिंतक, वैज्ञानिक शिक्षाविद् 17 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, उनकी हालत अत्यंत गम्भीर है, सरकार में बैठे सत्तासीन नेताओं ने अब तक किसी भी संवाद की पहल नहीं की। क्या सरकार सोनम वांगचुक के मौत का इंतजार कर रही है? हिमालय लद्दाख को बचाने की मांग पर सरकार ने कुटिलता पूर्ण ढंग से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के आरोप में सोनम वांगचुक को जेल में ट्रॅस दिया था। NEET पेपर के लगातार लीक होने से 20 छात्रों ने अपनी जान गँवा दी, फिर भी जवाबदेही तय नहीं हुई। पशु क्रूरता और इतना अत्याचार व तानाशाही तो अंग्रेज सरकार ने भी नही थी।
पशु प्रेमी निशा सिंह ने अपनी पांच मांगो में -
(1). केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी विफलता स्वीकार करें, जनता से माफी मांगें और अपना स्तीफा दें। प्रतियोगी परीक्षाओं की धाँधली की गहन जॉच हो।
(2). 20 जुलाई 2026 से संसद मानसून सत्र में परीक्षा प्रणाली में सुधार पारदर्शिता, विश्वसनीयता, गंभीर मुद्दा बनाते हुए रिजोलुशन लाया जाये।
(3). शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में पर्यावरण व मूक प्राणियों के साथ करूणा पूर्ण व्यवहार किये जाने को सम्मिलित किया जाये जैसा कि भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों 51 AG में निहित है।
(4). PCA 1960 कानून में पशुओं के प्रति क्रूरता पर मात्र 50 Rs जुर्माना को बढ़ाकर 50,000 किया जाये।
(5). IPC पशुओं के साथ बलात्कार (दुराचार) में सजा का प्रावधान था, किन्तु BNS में दण्ड का प्रावधान नहीं है जिसका समावेश किया जाये।


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