तोते को पिंजरे में कैद करना अब महंगा पड़ेगा: वन्यजीव अधिनियम के तहत हो सकती है 3 साल की जेल

नई दिल्ली: 

​एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) मालवीय नगर रिप्रेजेंटेटिव पूनम रानी बागड़ी ने एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान तोते को पिंजरे में रखने पर याद दिलाया कि अक्सर लोग घरों की शोभा बढ़ाने के लिए तोते जैसे सुंदर पक्षियों को पिंजरे में कैद कर लेते हैं, लेकिन शायद उन्हें इस बात का इल्म नहीं है कि यह शौक उन्हें जेल की हवा खिला सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों और कानून के जानकारों ने स्पष्ट किया है कि भारत में जंगली पक्षियों को कैद करना एक दंडनीय अपराध है।

यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत आता है। भारतीय दंड संहिता (BNS - Bharatiya Nyaya Sanhita) मुख्य रूप से सामान्य आपराधिक गतिविधियों के लिए है, लेकिन वन्यजीवों से संबंधित अपराधों के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम ही प्राथमिक कानून है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसार, तोता 'शेड्यूल' (Schedule) श्रेणी में आने वाला पक्षी है। इसे पालतू बनाना या पिंजरे में रखना अधिनियम की धारा 9 का सीधा उल्लंघन है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिंजरे में बंद तोते अपनी स्वाभाविक आजादी खो देते हैं और यह उनके प्रति क्रूरता है।

​यदि किसी के पास कोई जंगली पक्षी पिंजरे में है, तो उसे तुरंत निकटतम वन विभाग कार्यालय या रेस्क्यू सेंटर को सौंप देना चाहिए अन्यथा पकड़े जाने पर न केवल पक्षी को जब्त कर लिया जाएगा, बल्कि दोषी पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल भी हो सकती है। इस सम्बन्ध मे अधिकारियों का भी कहना है कि "प्रकृति की खूबसूरती उन्हें खुले आसमान में देखने में है, न कि उन्हें पिंजरे की सलाखों के पीछे सिकोड़ने में।"

​पूनम रानी बागड़ी ने कहा कि तोतो को कैद करने के सम्बन्ध मे सभी को यह बात मुख्य रूप से जरूर जाननी चाहिए कि यदि आप कहीं किसी को तोता कैद किए हुए देखते हैं, तो आप इसकी सूचना स्थानीय वन विभाग (Forest Department) या किसी पशु कल्याण संस्था (जैसे PETA, Wildlife SOS) को दे सकते हैं। और साथ ही उस कैद किए हुए तोते की फोटो, वीडियो बनाकर भी विभाग को दे सकते है। जिससे FIR कराने में आसानी होगी। 

भारत में किसी भी जंगली पक्षी, जिसमें तोता (Parrot) भी शामिल है, को पकड़ना, खरीदना, बेचना या उन्हें पिंजरे में कैद रखना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। जबकि कई लोग ऐसी गलतफहमी में रहते हैं कि इसे पिंजरे में रखना अपना घर का सामान्य शौक समझते है, लेकिन कानून के सामने यह वन्यजीवों के प्रति अपराध की श्रेणी में आता है।

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Milan Tomic

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