
जयपुर: एडवोकेट कपिल शर्मा द्वारा न्यूज रिपोर्ट।
मान्य राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर पीठ द्वारा डिफॉल्ट जमानत प्रार्थना पत्र पर महत्वपूर्ण दिशा निर्देश समस्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दिए गए है।
प्रकरण के तथ्य इस प्रकार है कि अभियुक्त को पुलिस द्वारा दिनांक 08.05.2026 को गिरफ्तार करके मान्य मजिस्ट्रेट के समकक्ष 09.05.2026 को पेश किया गया तथा मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त को दिनांक 22.05.2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया जिसके उपरांत समय समय पर अभियुक्त की न्यायिक अभिरक्षा मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा बड़ा दी गई।
प्रकरण में पुलिस द्वारा अनुसंधान करके अनुसंधान का नतीजा मान्य मजिस्ट्रेट के समकक्ष 90 दिन की वैधानिक अवधि में पेश किया जाना था। मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त की न्यायिक अभिरक्षा दिनांक 29.07.2026 को 11.08.2026 तक बढ़ा दी गई और दिनांक 29.07.2026 तक पुलिस द्वारा अनुसंधान का नतीजा मान्य न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया था। प्रकरण में अनुसंधान का नतीजा मान्य न्यायालय के समक्ष पेश करने की वैधानिक अवधि 90 दिन दिनांक 06.08.2026 को पूर्ण हो रही थी तथा प्रकरण में अनुसंधान नतीजा मान्य न्यायालय के समक्ष पेश नहीं हुआ था बावजूद इसके मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त की न्यायिक अभिरक्षा 11.08.2026 तक बढ़ा दी गई जो कि वैधानिक अवधि एवं मान्य उच्चतम न्यायालय तथा मान्य उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में प्रतिपादित सिद्धांतों एवं दिशा निर्देश के विरुद्ध थी।
दिनांक 11.08.2026 को भी मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त की न्यायिक अभिरक्षा दिनांक 25.08.2026 तक बढ़ा दी गई तथा अभियुक्त को यह अवगत नहीं करवाया गया कि अभियुक्त डिफॉल्ट जमानत प्राप्त करने का आधिकारी है क्योंकि पुलिस द्वारा अनुसंधान नतीजा वैधानिक अवधि में पेश नहीं किया गया है। दिनांक 18.08.2026 की प्रकरण में अभियुक्त की ओर से डिफॉल्ट जमानत प्रार्थना पत्र पेश कर डिफॉल्ट जमानत प्रदान करने का अनुरोध मान्य मजिस्ट्रेट से किया गया जिसमें मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा प्रार्थना पत्र को कार्यालय रिपोर्ट के साथ पेश करने का आदेश देते हुए सुनवाई हेतु दिनांक 19.08.2026 की तारीख नियत की गई।
कार्यालय रिपोर्ट के अनुसार अनुसंधान नतीजा न्यायलय के समक्ष पेश नहीं हुआ था और दिनांक 19.08.2026 को डिफॉल्ट जमानत प्रार्थना पत्र पर बहस सुन कर मान्य मजिस्ट्रेट द्वारा प्रार्थना पत्र पर आदेश हेतु दिनांक 20.08.2026 की तारीख नियत कर दी गयी और उसी दिन न्यायालय के समक्ष अनुसंधान नतीजा पुलिस द्वारा पेश कर दिया गया।
जिसके उपरांत मान्य मजिस्ट्रेट ने डिफॉल्ट जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया और आदेश दिया गया कि अनुसंधान नतीजा पुलिस द्वारा पेश कर दिया गया है अतः डिफॉल्ट जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
मान्य राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि मान्य मजिस्ट्रेट को 90 दिवस की वैधानिक अवधि जिस दिन पूर्ण हो रही थी उस दिन अर्थात 06.08.2026 के बाद न्यायिक अभिरक्षा नहीं बढ़ानी चाहिए थी तथा अभियुक्त को यह अवगत करवाना चाहिए था कि उसके पास डिफॉल्ट जमानत प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है।
मान्य राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा यह भी दिशा निर्देश जारी किये गये है कि डिफॉल्ट जमानत प्रार्थना पत्र प्राप्त होने की दशा में संबंधित न्यायालय का कर्मचारी जमानत प्रार्थना पत्र प्राप्त होने की तिथि और समय स्पष्ट रूप से अंकित करेगा तथा यह भी स्पष्ट रूप से अंकित करेगा कि प्रकरण में अनुसंधान नतीजा न्यायलय में पेश हुआ है अथवा नहीं साथ ही यह भी दिशा निर्देश दिये है कि जिस दिन डिफॉल्ट जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया जाएगा उसी दिन न्यायालय के समक्ष सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया जाएगा जिससे कि ऐसे प्रकरण में अनावश्यक विलम्ब न हो।
मान्य न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि वैधानिक अवधि पूर्ण होने के पश्चात यदि अनुसंधान नतीजा पुलिस द्वारा पेश नहीं किया गया है और अभियुक्त को उसके बावजूद भी न्यायिक अभिरक्षा में रखा जाता है तो ऐसी न्यायिक अभिरक्षा वैधानिक नहीं है तथा अभियुक्त की वैधानिक एवं संवैधानिक अधिकारों पर अतिक्रमण है।
मान्य राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति मान्य श्री न्यायधीश अनिल कुमार उपमान जी द्वारा उक्त आदेश पारित कर मान्य राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जरनल को उक्त आदेश की प्रति सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीश को प्रेषित करने के निर्देश दिए ।
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