जहाँ एक तरफ आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इंसानों की परेशानियों से भी मुंह मोड़ लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी असाधारण शख्सियतें भी हैं जो मूक-बेजुबान जानवरों की पीड़ा को अपना दर्द मानकर उनकी जिंदगी बचाने में दिन-रात एक कर देती हैं। दिल्ली के नवादा क्षेत्र में रहने वाली प्रीति पांडेय ऐसी ही एक सच्ची पशु प्रेमी और मसीहा हैं, जो पिछले कई वर्षों से बेसहारा और जरूरतमंद जानवरों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही हैं।
नवादा और उसके आसपास के इलाकों में जब भी कोई बेजुबान जानवर किसी सड़क दुर्घटना का शिकार होता है, किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आता है, या फिर पशु क्रूरता का शिकार होकर दर्द से तड़प रहा होता है, तो सबसे पहले प्रीति पांडेय का नाम ज़ेहन में आता है। प्रीति का दिल इन लाचार जीवों की तकलीफ देखकर पसीज जाता है। वह ऐसे जानवरों को ऐसी दयनीय अवस्था में बिल्कुल नहीं देख सकतीं, इसलिए वह तुरंत खुद आगे आकर उनके रेस्क्यू और इलाज की कमान संभालती हैं।
घायल जानवरों को समय पर सही इलाज मिलना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन प्रीति पांडेय इस मोर्चे पर पूरी निष्ठा से जुटी हैं। वह न सिर्फ गंभीर रूप से बीमार या घायल जानवरों को अस्पताल पहुंचाती हैं, बल्कि उनका नियमित मेडिकल ट्रीटमेंट भी अपनी देखरेख में करवाती हैं। जब तक जानवर पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाता, वह उसकी रिकवरी और दवाइयों का पूरा ध्यान रखती हैं।
प्रीति पांडेय का सेवा कार्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इन बेजुबानों की बुनियादी जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखती हैं।
वह नियमित रूप से क्षेत्र के बेसहारा बेजुबान डॉग्स और अन्य जानवरों के लिए भरपेट भोजन का प्रबंध करती हैं।
पशुओं में रेबीज जैसी घातक बीमारियों की रोकथाम के लिए समय-समय पर उनका टीकाकरण कराती हैं। साथ ही, इलाके में पशुओं की संख्या को नियंत्रित करने और उनके स्वस्थ जीवन के लिए नसबंदी अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
मौसम में बदलाव या अन्य कारणों से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए वह जानवरों की अन्य मेडिकल जांचें भी समय-समय पर सुनिश्चित करती रहती हैं।
प्रीति पांडेय का यह सेवा कार्य पूरी तरह से नि:स्वार्थ भाव से कर रही है। अपने दृढ़ संकल्प और असीम पशु प्रेम के दम पर वह अकेले ही इन मूक जीवों की जिंदगी में उम्मीद की किरण जगा रही हैं।
समाज में जहाँ कई लोग जानवरों के प्रति उदासीन रहते हैं, वहीं प्रीति पांडेय जैसी शख्सियतें यह साबित करती हैं कि इंसानियत और करुणा अभी भी जीवित है। नवादा क्षेत्र के बेजुबानों के लिए वह किसी फरिश्ते या ईश्वर के अवतार से कम नहीं हैं, जो उनकी खामोश आहों को सुनकर उनकी ढाल बनकर खड़ी रहती हैं।

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