Ediror: TASIM AHAMAD
नई दिल्ली: 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों की याद में दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब स्थित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जो सच की दीवार 'वॉल ऑफ ट्रुथ' (Wall of Truth) पर उपस्थित लोगों ने कैंडल जलाकर मृतकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और इस त्रासदी पर गहरा रोष एवं शोक व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं और पीड़ितों ने तात्कालीन कांग्रेस सरकार की नीतियों और पीड़ितों की मदद में किए गए भेदभाव पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि 1984 की त्रासदी के बाद पीड़ितों को मदद और राहत राशि पहुँचाने में राज्यों के बीच काफी मतभेद देखने को मिले।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा पीड़ितों को 25-25 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी गई, जबकि दिल्ली में यह राशि केवल 12 लाख रुपये ही सीमित रखी गई। इस तरह की असमानता और अन्यापूर्ण रवैये के कारण पीड़ित परिवारों में आज भी गहरा असंतोष और आक्रोश बना हुआ है।
इस श्रद्धांजलि सभा में सिख समुदाय के प्रतिनिधि, समाजसेवी और पीड़ित परिवार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस दौरान सतिंदर पाल सिंह नागी (मेंबर, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी - DSGMC), रमिंदर सिंह स्वीटा (मेंबर, DSGMC), सुरजीत सिंह जीती (मेंबर, DSGMC), दलबीर कौर (डायरेक्टर, रामगढ़िया कोपरेटिव बैंक), सुरजीत कौर (स्टेट वाइस चेयरपर्सन , रीयल हेल्प ब्यूरो), देवेंद्र कौर, जगविंदर कौर, देवेंदर कौर, रानी कौर, ज्ञान सिंह, बलबीर सिंह, गुरमीत सिंह, जगजीत सिंह, कुलविंदर सिंह, मनजीत सिंह, राजबीर चौहान, मनदीप कुमार और प्रीत सिंह सहित कई अन्य गणमान्य हस्तियां मौजूद रही।







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