
नई दिल्ली : टी एन भारती द्वारा न्यूज़ रिपोर्ट
अंग्रेजो भारत छोडो आन्दोलन के लिए सरहदी गान्धी भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खान ( बादशाह खान) ने हिन्दू मुस्लिम एकता को सदैव ध्यान मे रखा । बादशाह खान की पुन्य तिथी के अवसर पर सरहदी गान्धी मेमोरियल सोसाइटी ( एस जी एम एस) की ओर से आईडिया ऑफ इन्डिया विषय पर इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेन्टर मे राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गाया।
एस जी एम एस के संस्थापक एडवोकेट सैयद जलालुददीन ने विचार विमर्श करते हुए कहा कि सरहदी गान्धी ने देश के बंटवारा का हमेशा विरोध किया। हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए जीवन अर्पित कर दिया। बादशाह खान की प्रबल इच्छानुसार पठान समुदाय को भारत मे ही रहकर देश की प्रगति के लिए काम करना चाहिए।
इस अवसर पर प्रोफेसर राम पुनियानी ने कहा कि मुगल बादशाहत पर हमला करने वाले भारतीय शासक अमित शाह को अपने नाम से फारसी भाषा शाबद शाह हटाना चाहिए। भारत के संविधान मे सभी नागरिको को समान अधिकार प्राप्त है। धर्म की राजनीति पर लगाम लगाना अति आवश्यक है ।
डाक्टर पुनयानी ने कहा कि एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय पर निशाना बनाकर नफरत फैलाना निंदनीय है । देश की आजादी मे मुस्लिम समुदाय ने जान की बाजी लगा दी ।
वैज्ञानिक गोहर रजा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक धर्म के कट्टर पंथियो का विरोध अति आवश्यक है । खान अब्दुल गफ्फार के पद चिन्ह पर चल कर ही नफरत को समाप्त किया जा सकता है ।
इतिहास कार डाक्टर रूचिका शर्मा ने कहा कि बादशाह खान की जीवन शैली और कुर्बानी की जानकारी विरासत मे मिली है। दादा दादी ने बताया कि बादशाह खान ने ही सब से पहले भाई चारा और सौहार्द की बात रखी थी । अन्तिम सांस तक उन्होंने भारत की प्रगति के लिए बिना किसी लालच के काम किया ।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ कील जेड के फैजान ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को अपने ही देश मे बेगाना बनाकर अत्याचार करना मानवीय स्तर पर दुखद है। भारत के संविधान मे संशोधन असम्भव है। किसी भी धर्म पर वार करना सहन नही किया जा सकता । हिजाब हो या घुंघट नमाज हो या पूजा व्यक्तिगत रूप से धर्म अधिकार प्राप्त है ।
प्रोफेसर अखलाक ने चिन्ताजनक स्वर मे कहा कि बादशाह खान ने आजादी के बाद भी पाकिस्तान की जेल मे जीवन काटा। सच्चे स्वतंत्रता सैलानी के त्याग की दास्तान इतिहास मे हमेशा जीवित रहेगी। कार्यक्रम का संचालन मेरा वतन के सम्पादक मोहम्मद अहमद ने किया! अंत मे महाराष्ट्र के पूर्व उप_ मुख्यमंत्री अजीत दादा को भी भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की गई। सम्मेलन मे जाने माने बुद्धिजीवी, लेखक, इतिहास कार, समाजिक कार्यकर्ताओ ने भाग लिया।

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